डायबिटीज का आयुर्वेदिक इलाज है सदाबहार की पत्तियां, जानें सेवन का तरीका

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आयुर्वेद कई हर्बल उपचारों का एक खजाना है। प्राचीन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों और रोगों के प्रबंधन और उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधियों की मदद ली जाती थी। आजकल, स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए आधुनिक और वैश्वीकृत विज्ञान आयुर्वेदिक प्रथाओं को एकीकृत किया गया है। ऐसे ही आयुर्वेद में कई ऐसी दवाएं हैं जो रक्त शर्करा यानी ब्लड शुगर को कंट्रोल करती हैं।

डायबिटीज (माधुमेह) एक चयापचय कफ प्रकार का विकार है जिसमें अग्नि (पाचन आग) की कम कार्यप्रणाली उच्च रक्त शर्करा की प्रवृत्ति को जन्म देती है। रक्त शर्करा में स्पाइक्स को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेद ने सदाबाहर जड़ी बूटी होने का सुझाव दिया है। जिसके बारे में हम आपको इस लेख में बता रहे हैं।

सदाबहर क्या है?

सदाबाहर या पेरिविंकल, भारत में एक आम तौर पर पाया जाने वाला पौधा है। यह एक सदाबहार झाड़ी है जो एक सजावटी पौधे और औषधीय उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। यह फूलों के साथ चिकनी, चमकदार और गहरे हरे रंग की पत्तियों को टाइप-2 डायबिटीज के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ के मुताबिक, “सदाबाहर फूलों और पत्तियों का उपयोग रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। सुबह में फूलों और पत्तियों से बनी हर्बल चाय बहुत ही लाभकारी साबित हो सकती है।

मधुमेह के लिए सदाबहर के स्वास्थ्य लाभ

सदाबहर का लंबे समय से आयुर्वेद और चीनी दवाओं में उपयोग किया जाता रहा है। यह मलेरिया, गले में दर्द और ल्यूकेमिया जैसी स्थितियों के प्रबंधन के लिए प्रयोग किया जाता है। विंका गुलाला में दो सक्रिय यौगिक, एल्कालोइड और टैनिन शामिल हैं।

मधुमेह के लिए सदाबहर का उपयोग कैसे करें?

1: सदाबहार की ताजा पत्तियों को सूखाकर उसका पाउडर बना लें और इसे सील्ड पैक डब्बे में रख दें। पाउडर को रोजाना एक चम्मच ताजा फलों के रस या पानी के साथ लें। पाउडर कड़वा स्वाद हो सकता है।

2: सदाबहार की तीन से चार पत्तियों से ज्यादा कभी न लें। रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित करने के लिए इसे दिन में चबा सकते हैं।

3: सदाबहार पौधे का गुलाबी रंग के फूल लो और उन्हें एक कप पानी में उबाल लें। पानी को छान लें और हर सुबह इसे खाली पेट पर पीएं।

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